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गोरा" रवीन्द्रनाथ टैगोर का उपन्यास अंग्रेज़ी शासन में भारत की 44 राष्ट्रीय चेतना का औपन्यासिक महाकाव्य है। इसमें बांग्ला संस्कृति की ही नहीं अपितु समस्त भारतीय संस्कृति की वैचारिकता का समाहार है। इस कृति में रवीन्द्रनाथ ने भारत क ... celý popis
Hindština
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गोरा" रवीन्द्रनाथ टैगोर का उपन्यास अंग्रेज़ी शासन में भारत की 44 राष्ट्रीय चेतना का औपन्यासिक महाकाव्य है। इसमें बांग्ला संस्कृति की ही नहीं अपितु समस्त भारतीय संस्कृति की वैचारिकता का समाहार है। इस कृति में रवीन्द्रनाथ ने भारत की प्राचीन और आधुनिक चिंतन परंपराओं का विश्लेषण प्रस्तुत किया है। धर्म और कर्म के द्वंद्व को आधुनिक दृष्टि से मानवता के संदर्भ में देखा है।
नवजागरण आंदोलन की सबसे बड़ी समस्या धार्मिक कर्मकांड और कट्टर ब्राह्मणत्व के आचार-विचारों से आक्रांत भारतीय समाज की अंतश्चेतना थी। रवीन्द्रनाथ ने "गोरा" उपन्यास के माध्यम से हिंदुत्व के विभिन्न व्यावहारिक स्वरूपों की आलोचनात्मक प्रोक्ति प्रस्तुत की है।
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Zařazení knihy Knihy v němčině Belletristik Erzählende Literatur Hauptwerk vor 1945
599 Kč
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